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हिंदी मैं सब क्या है

एक हिंदी ब्लॉगिंग वेबसाइट हैं जिसमें आपको सभी जानकारियां हिंदी भाषा में प्रदान की जाती हैं. इस लिए इसका नाम भी हमने "हिंदी मैं सब" रखा है जो की नाम से ही पता लग जाता है की यहाँ पर सभी जानकारियां हिंदी में होंगी, विभिन्न विषयों पर जानकारी इक्कट्ठी कर उसे पाठकों तक पहुँचाने का कार्य हमारी टीम द्वारा किया जाता हैं जिसमें बहुत से लोग कार्य करते है, जो अपने –अपने शौक के अनुसार विभिन्न विषयों पर लिखते है. यह सभी लोग ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएट हैं इसमें तक़रीबन लोग जॉब करते है लेकिन लेखन में रूचि होने के कारण वे सभी नियमित रूप से "हिंदी मैं सब" के लिए लिखते हैं. "हिंदी मैं सब" में आपको सारे जानकारी हिंदी भाषा में लिखी जाती है. यह सभी विषयों पर हमारे लेखक रिसर्च करके सारी जानकारी देने के लिए कठिन परिश्रम करते हैं और अपने पाठकों की रूचि एवं उनकी इच्छानुसार कंटेंट तैयार करते हैं. हमारा ब्लॉग भी हिंदी भाषा में बड़ी मात्रा में सामाग्री को इंटरनेट पर उपलब्ध करवाने  में रोचक भूमिका अदा कर रहा है जिसका श्रेय हमारे लेखको को जाता हैं जो दिन रात हमारे लिये काम करते हैं.

आपने अब तक मेरे ब्लॉग के बारे में जाना, जिसमे आपको बताया गया है कि आप क्या -क्या पढ़ सकते हैं लेकिन अब हम कुछ पीछे जाते हैं और आपको यह बताते हैं कि कैसे मैं एक ब्लॉगर बना और कैसे "हिंदी मैं सब" एक टीम बनी.



मैं कौन हूँ : राजन वर्मा (संस्थापक "हिंदी मैं सब")

मेरा नाम राजन वर्मा  हैं और मैं पंजाब के शहर लुधियाना का रहने वाला हूँ. मैंने आर्ट्स विषय में प्राइवेट से ग्रेजुएशन किया है इसके पीछे भी कारन है क्यों के मेरे घर के हालात ठीक नहीं थे तो में साथ में जॉब भी करता था और पड़ता भी था मैंने अपने जीवन में बहुत सी मुश्किलों का सामना किया है और आज भी कर रहा हूँ एक ऐसा समय भी आया था जब मुझे मेरी पढ़ाई बिच में छोड़नी पड़ गयी थी जिस कारन मेरे साल ख़राब हो गए थे पर मैंने फिर भी ग्रेजुएशन पूरा किया साथ में मैंने कभी किसी कपडे की दूकान पर काम कियाकभी किसी बिजली की दुकान पर काम किया और कभी कूरियर का काम किया जब मैंने कूरियर कंपनी में जॉब करि उस समे मेरे पास साइकिल तक नहीं था की में साइकिल पर कूरियर इकट्ठा कर सकता साइकिल भी किसी दोस्त से लेनी पड़ी थी  फिर धीरे धीरे मैंने पुरानी साइकिल ली जिस से की मेरा काम चल सके उस समय हम किराये के मकान पर रहते थे एक दिन जो हमारे मकान मालिक थे उन्होंने मुझे राय दी की तुम साथ में डी.टी.पी.(DTP) का कोर्स कर लो डी.टी.पी.(DTP) का मतलब होता है डिजाइनिंग टू प्रिंटिंग(Designing to Printing) ये प्रिंटिंग की लाइन में जाता है फिर मैंने ग्राफ़िक डिजाइनिंग(Graphic Designing) का कोर्स किया साल का कोर्स था मैंने कोर्स तो कर पूरा कर लिया पर अब जॉब नहीं मिल रही थी क्यों की मेरे पास अनुभव(Experience) नहीं था फिर मैंने अनुभव(Experience) लेने के लिए किसी प्रिंटर के पास जॉब किया वो भी बहुत कम सैलरी पर उस समय मुझे केवल 800/-रुपए मिलते थे और साथ में काम भी सिखाते थे उस समय कार्यालय (Office) को खोलने से लेकर उसके साफ सफाई तक सब मुझे करना पड़ता था मैंने किया भी क्यों के मुझे काम सीखना था फिर धीरे धीरे में काम सीखता गया मेरा अनुभव बढ़ता गया अनुभव के साथ साथ मेरा वेतन(Salry) भी बढ़ता गया करते करते मेरा वेतन(Salary) 25000 तक हो गया साथ में मुझे इंटरनेट के बारे में भी काफी जानकारी हो गयी थी क्यों की मेरा काम भी आई.टी.(Internet Technology) से सम्बंधित था इस लिए मुझे ऑनलाइन भी काफी कुछ सिखने को मिला बस उसी में ये ब्लॉग वाली कहानी भी है एक दिन ऐसे ही मैंने ऑनलाइन ब्लॉग के बारे में पड़ा के ब्लॉग से भी पैसा कमाया जा सकता है वो भी बिना अपनी जॉब छोड़े तो मुझे ये सबस अछि बात लगी के जॉब भी नहीं छोड़नी पड़ेगी और पैस भी कमा सकते है फिर मैंने अपना ब्लॉग शुरू करने के बारे में सोचा जो की इस समय आप पढ़ रहे "हिंदी मैं सब" हिंदी मैंने इस लिए चुनी क्यों की में चाहता था के मेरे ब्लॉग को सभी पढ़ सके तो हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जिसको सब पढ़ सकते है इसमें हम सभी जानकारी हिंदी में लिखते है जिस से की जिसको इंग्लिश नहीं भी आती वो भी इंटरनेट पर हिंदी में जानकारी ले सके इस लिए मैंने ब्लॉग शुरू किया जो की जितनी जानकारी मुझे मिलती है वो में आप लोगो के साथ साझा कर सकूँ |

आगे जैसे मेरा अनुभव(Experience)  रहेगा में आपको बताता रहूँगा ताकि अगर आप में से भी कोई ब्लॉगर बनना चाहता है तो उसके भी मदद मिल सके |

अगर आपके मन में कोई भी सवाल मेरे लायक है तो आप मुझ से पूछ सकते है आप मुझे कमेंट कर सकते हो या मुझे मेल (email: contact@hindimesub.com) भेज सकते हो |

में अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूँगा की आपके सवालों का जवाब दे सकूँ |

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